उज्जैन, 8 अक्टूबर। ग्राम बरखेड़ाबुजुर्ग की श्रीमती शारदा दीदी कभी आर्थिक तंगी के चलते मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने में सहयोग करती थीं। सीमित कृषि भूमि और प्राकृतिक आपदाओं के कारण परिवार की आमदनी इतनी नहीं थी कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और परिवार को अच्छा जीवन स्तर मिल सके। आज स्व-सहायता समूह से जुड़कर शारदा दीदी ने बकरी पालन को अपनी आजीविका का साधन बनाया है और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।समूह से जुड़ने से पहले शारदा दीदी अधिक पढ़ी-लिखी नहीं थीं और केवल हस्ताक्षर कर पाती थीं। उनके पति कृषि कार्य करते हैं तथा परिवार के पास करीब पांच बीघा कृषि भूमि है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण कई बार फसल का उत्पादन प्रभावित होता था, जिससे परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाता था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना भी उनके लिए चुनौती थी।वर्ष 2023 में आजीविका मिशन के अंतर्गत ग्राम बरखेड़ाबुजुर्ग में स्व-सहायता समूहों के गठन के लिए टीम पहुंची। शारदा दीदी ने अन्य महिलाओं के साथ योजना की जानकारी ली और अपने मोहल्ले की 12 महिलाओं के साथ मिलकर लक्ष्मी आजीविका स्व-सहायता समूह का गठन किया। समूह में उन्हें अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। समूह के माध्यम से मिलने वाले लाभ और योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने के बाद उनमें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास बढ़ा।शारदा दीदी नियमित रूप से ग्राम संगठन एवं सीएलएफ की बैठकों में शामिल होने लगीं। इन बैठकों में विभिन्न गांवों से आने वाली महिलाओं से उनकी मुलाकात हुई। उन्होंने जाना कि स्व-सहायता समूह से जुड़कर गांव में रहते हुए भी विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से आमदनी बढ़ाई जा सकती है। इससे उनके आत्मविश्वास में लगातार वृद्धि हुई।समूह के माध्यम से आरएफ एवं सीआईएफ से प्राप्त आर्थिक सहायता का उपयोग करते हुए शारदा दीदी ने 12 बकरियां खरीदकर बकरी पालन शुरू किया। बकरी पालन से उनकी नियमित आमदनी में वृद्धि हुई और परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आने लगा। आज वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करने के साथ बच्चों की परवरिश एवं उनकी शिक्षा पर भी ध्यान दे पा रही हैं।शारदा दीदी की सफलता से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ गांव और समाज में उनके सम्मान में भी वृद्धि हुई है। अब वे गांव की अन्य महिलाओं को भी आजीविका मिशन एवं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।शारदा दीदी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। समूह से जुड़कर उन्हें न केवल आजीविका का नया साधन मिला, बल्कि अपने अनुभव साझा करने, निर्णय लेने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी मिला।

मध्यप्रदेशपंचायत और ग्रामीण विकास
स्व-सहायता समूह से जुड़कर शारदा दीदी ने बदली परिवार की आर्थिक स्थिति
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फटाफट डेस्क · 8 अक्टूबर 2026 · पूरी खबर 4 मिनट