जबलपुर में मदन महल के पास देवताल क्षेत्र की बैलेंसिंग रॉक एक सीधा सवाल खड़ा करती है: ऊपर का इतना बड़ा पत्थर नीचे की चट्टान के छोटे हिस्से पर कैसे टिका है? इसकी बनावट को समझने के लिए पत्थर के आकार और उसके संतुलन को अलग-अलग देखना उपयोगी है।
पहले चट्टान की पहचान। भूवैज्ञानिक जोसेफ हार्टमैन की 1995 की तस्वीर जियोसाइंस डिजिटल इमेज लाइब्रेरी में दर्ज है। अभिलेख इसे मदन महल क्षेत्र का ग्रेनाइट बताता है। तस्वीर में ऊपरी चट्टान के गोल किनारे और उसके नीचे बचा छोटा संपर्क-क्षेत्र साफ दिखाई देते हैं।
पत्थर गोल कैसे होता है
ग्रेनाइट के गोल आकारों की सामान्य व्याख्या USGS देता है। पानी दरारों में प्रवेश करके चट्टान में रासायनिक बदलाव करता है। जहाँ दरारें मिलती हैं, वहाँ कोने पहले कमजोर पड़ सकते हैं। परतें ढीली होकर अलग होती हैं और समय के साथ नुकीले खंड गोल होने लगते हैं। इसे स्फेरॉइडल वेदरिंग कहा जाता है।
इस प्रक्रिया से ग्रेनाइट के गोल पत्थरों को समझने का संदर्भ मिलता है। किसी खास चट्टान का पूरा बनने का इतिहास जानने के लिए उसकी दरारों, खनिजों और आसपास की बनावट का अध्ययन चाहिए। केवल तस्वीर से उसकी उम्र या बनने में लगा समय निकालना संभव नहीं है।
फिर इतना वजन सँभलता कैसे है? भौतिकी में वस्तु का भार-केंद्र और नीचे का सहारा महत्वपूर्ण हैं। OpenStax के स्थिरता अध्याय के अनुसार भार-केंद्र की सीध सहारे के आधार के भीतर रहना पलटने से बचने की अहम शर्त है। इसलिए छोटा दिखता सहारा अपने आप में असंभव संतुलन का प्रमाण नहीं। जबलपुर की यह चट्टान इन्हीं सवालों को आँखों के सामने ले आती है।
मुख्य बातें
- GeoDIL के भूवैज्ञानिक फोटो-अभिलेख में इस चट्टान को ग्रेनाइट के रूप में दर्ज किया गया है।
- ग्रेनाइट की दरारों पर होने वाली टूट-फूट और रासायनिक बदलाव से गोल आकार बन सकते हैं।
- संतुलन में भार का फैलाव और सहारे की स्थिति अहम हैं; केवल संपर्क का आकार पूरा जवाब नहीं देता।
स्रोत और संदर्भ
- जियोसाइंस डिजिटल इमेज लाइब्रेरी — Joseph Hartman · GeoDIL 122: Balancing rock (Archean granite) ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, USGS · Our Dynamic Desert — Granitic Rocks and Associated Landforms ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- राइस यूनिवर्सिटी, OpenStax · College Physics — 9.3 Stability ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- पर्यटन मंत्रालय, अतुल्य भारत · Balancing Rocks, Jabalpur ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।



