ग्वालियर के गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने 30 अगस्त को अपना पहला किडनी प्रत्यारोपण पूरा किया। मध्यप्रदेश जनसम्पर्क विभाग ने इसे ग्वालियर और चंबल संभाग के किसी शासकीय चिकित्सा संस्थान में पहली ऐसी प्रक्रिया बताया है।

छतरपुर के 60 वर्षीय मरीज को उनकी 55 वर्षीय पत्नी ने किडनी दी। दोनों को 29 अगस्त को भर्ती किया गया था। विभागीय सूचना के अनुसार जाँच, काउंसलिंग और अनुकूलता परीक्षण के बाद अगली सुबह करीब साढ़े आठ बजे प्रक्रिया शुरू हुई और दोपहर लगभग तीन बजे पूरी हुई। 30 अगस्त की विज्ञप्ति जारी होने के समय दोनों की हालत स्थिर बताई गई थी।

कई विभागों की साझा टीम

अस्पताल के नेफ्रोलॉजी, एनेस्थीसिया और यूरोलॉजी विभागों ने मिलकर काम किया। दिल्ली से आई मणिपाल हॉस्पिटल की यूरोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट टीम ने भी सहयोग दिया। विज्ञप्ति में अलग आईसीयू और चौबीसों घंटे चिकित्सकीय निगरानी की व्यवस्था का उल्लेख है।

प्रत्यारोपण के लिए सर्जरी के साथ दाता और प्राप्तकर्ता की जाँच, विशेषज्ञ विभागों का तालमेल और बाद की निगरानी जुटाई गई। ग्वालियर के इस सरकारी संस्थान की पहली प्रक्रिया में स्थानीय टीम के साथ बाहर से आए विशेषज्ञों का सहयोग भी शामिल रहा।

इस मामले में आयुष्मान से खर्च

विभाग के अनुसार इस प्रत्यारोपण का खर्च आयुष्मान योजना के अंतर्गत लिया गया और परिवार से शुल्क नहीं लिया गया। यह उसी मामले का विवरण है। अगली प्रक्रियाओं का कैलेंडर और नियमित सेवा के लिए आवेदन की जानकारी विज्ञप्ति में नहीं दी गई है।

मुख्य बातें

  • 30 अगस्त 2026 को गजराराजा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण पूरा हुआ।
  • विभाग ने इसे ग्वालियर–चंबल के शासकीय चिकित्सा संस्थानों में पहला बताया।
  • इस मामले का खर्च आयुष्मान योजना के अंतर्गत लिया गया; परिवार से शुल्क नहीं लिया गया।

स्रोत और संदर्भ

  1. मध्यप्रदेश जनसम्पर्क विभाग / MPInfo · ग्वालियर और चंबल संभाग में पहली बार किसी शासकीय अस्पताल में हुआ किडनी ट्रांसप्लांट ↗30 अगस्त 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

यह खबर शेयर करें